Wednesday, September 28, 2022
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Bhopal News: मैनिट के इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने किया सुसाइड, पेड़ पर लटकी मिली लाश

भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल के मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) के एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने पेड़ पर फंदा लगाकर सुसाइड कर लिया। शनिवार सुबह उसकी लाश पेड़ पर लटकी मिली। खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच करने में जुट गई। खुदकुशी की वजह सामने नहीं आई है। पुलिस मामले में जांच कर रही है। कमला नगर थाना पुलिस ने बताया, स्टूडेंट उद्देश्य अहिरवार उम्र 22 साल ने स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के नजदीक पेड़ पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वह मैकेनिकल इंजीनियरिंग फाइनल ईयर में था। संस्थान के हॉस्टल नंबर-8 में रहता था।

बुरहानपुर का रहने वाला था उद्देश्य
पुलिस ने बताया, उद्देश्य बुरहानपुर का रहने वाला था और मैनिट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में फाइनल ईयर में पढ़ाई कर रहा था। शुक्रवार रात 8 बजे तक उद्देश्य हॉस्टल में दोस्तों के साथ रहा। इस समय तक वह दूसरे स्टूडेंट्स की तरह सामान्य था। तभी अचानक दोस्तों से बिना कुछ कहे बाइक लेकर हॉस्टल से चला गया। इसके बाद पूरी रात उद्देश्य हॉस्टल वापस नहीं लौटा। शनिवार सुबह कैंपस में रह रहे स्टूडेंट्स और फैकल्टी स्टाफ जब स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की ओर गए तो उद्देश्य का शव पेड़ पर रस्सी के फंदे पर लटका देखा।

सड़क किनारे बाइक खड़ी कर के लगाई फांसी
पुलिस ने बताया कि उद्देश्य ने खुदकुशी से पहले अपनी बाइक को कैंपस में ही सड़क किनारे पार्क किया। यहां से वह कैंपस के ग्रीन बेल्ट में लगे पेड़ के नजदीक पहुंचा। इसी पेड़ पर साथ लाए रस्सी से छात्र ने फांसी लगा ली

इनका कहना
‘मेनिट में स्पोर्ट कांप्लेक्स के पास एक इंजिनियरिंग के छात्र ने पेड़ पर लटककर फांसी लगा ली है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति का खुलासा होगा। हालांकि आज दिनभर से हम जांच में जुटे हुए हैं। वजह का अभी पता नहीं चल सका है कि क्यों सुसाइड किया।
-अनिल वाजपेयी, टीआई, कमलानगर थाना।

किशोरावस्था मेें जहां शारीरिक बदलाव आते हैं वहीं मानसिक बदलाव भी बच्चों में देखने को मिलते हैं, ये हार्मोनल डिसीज होती हैं। कई बार माता पिता को इसकी गंभीरता समझ में नहीं आती है। उम्र के साथ साथ व्यवहार में भी बदलाव होने लगता है, जो कि इमोशनल चेंजेस में बदलता हैं। इसे हमें समझना चाहिये क्योंकि यहीं से अवसाद शुरू होता है और व्यक्ति जिंदगी से निराश हो जाता है। हमें बच्चों की मानसिक परेशानी को समझना चाहिए और उनके साथ बातचीत करके उन्हें समझाना चाहिए।
-डॉ. रूमा भट्टाचार्य, मनोचिकित्सक भोपाल

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