Wednesday, September 28, 2022
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भारी बारिश के चलते देश जलमग्न, ऐसे में उमा भारती को याद आई अटल जी की नदी जोड़ परियोजना

देश में मानसून का दौर जारी है। अलग अलग हिस्सों में भारी बारिश के चलते जलभराव की स्थिति निर्मित हुई है। ऐसे में मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाचपेयी की महत्वाकांक्षी नदी जोड़ परियोजना की याद आ गई। उमा ने लिखा कि भारत के अधिकतर राज्य अभी जल मग्न हैं या तो सूखा या बाढ़, इन दोनों का समाधान अटल जी की सरकार ने सोचा था रिवर इंटर लिंकिंग (नदी जोड़ो परियोजना)l इसके लिए एक कमेटी बनी थी।  दरअसल 1999 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो परियोजना पर काम शुरू किया था । हालांकि 2004 में एनडीएन सरकार जाते ही यह योजना फिर ठंडे बस्ते में चली गई। यूपीए में पर्यावरण मंत्री रहे जयराम रमेश ने इस परियोजना को विनाशक बताया था।

क्या लिखा है उमा भारती ने 

बुधवार को उमा ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा कि  भारत के अधिकतर राज्य अभी जल मग्न हैं या तो सूखा या बाढ़, इन दोनों का समाधान अटल जी की सरकार ने सोचा था रिवर इंटर लिंकिंग (नदी जोड़ो परियोजना)l इसके लिए एक कमेटी बनी, श्री सुरेश प्रभु जी उसके अध्यक्ष बने, मैं उसी समय पर मुख्यमंत्री बनीl और हमने ही सबसे पहले मध्य प्रदेश में श्री सुरेश प्रभु जी को बुला लिया और टीटीटीआई भोपाल के हॉल में राज्य सरकार की उनके साथ बैठक हुई l हमने तेजी से काम करते हुए यूपी के मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह जी से संपर्क किया एवं ‘’केन बेतवा’’ जोड़ने के लिए वह तुरंत राजी हो गएl दोनों राज्यों के संबंधित अधिकारियों की कमेटी बन गईl हमारी समिति ने प्रस्ताव तैयार करके श्री सुरेश प्रभु जी की कमेटी को सौंपाl  7. अब दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच में एमओयू साइन होना थाl उसी समय मैंने मुख्यमंत्री का पद छोड़ा पर श्री गौर जी और श्री मुलायम सिंह जी के बीच में एमओयू साइन हुआl भारत की रिवर लिंकिंग परियोजना का ‘’केन बेतवा’’ पहला प्रस्ताव हैl

उमा ने लिखा कि फिर श्री सुरेश प्रभु जी की कमेटी ने देश भर के 29 लिंक के और प्रस्ताव बनाकर केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय को सौंप दियेl किंतु भारत का भाग्य तो बदल चुका था, श्री मनमोहन सिंह जी की सरकार जून, 2004 में बन चुकी थीl
फिर तो वह रिवर इंटर लिंकिंग की सारी प्रस्तावना 10 साल तक एक फाइल में बंद होकर धूल खाती रहींl फिर आई 2014 में पूर्ण बहुमत की श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकारl मेरे जल संसाधन मंत्री बनने पर जब विभाग ने मेरे सामने मंत्रालय की योजनाओं के प्रेजेंटेशन शुरू किए तो उसमें इस योजना को देखकर मैं आनंद एवं उत्साह से भर गईl अब मेरे पास गंगा के अलावा नदी जोड़ो योजना भी थीl जिसमें भारत की सभी महत्वपूर्ण नदियों के 30 लिंक थे एवं 34000 मेगा वाट बिजली और 35 मिलियन हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकती थीlयोजना को शुरू करने के लिए अधिकतम 3 साल और पूरा करने के लिए अधिकतम 15 साल लगने थेl इससे भारत की जीडीपी में भारी उछाल आना था इस जीडीपी में किसान एवं भारत के गांव के नौजवानों का भविष्य संवरना थाl हमारे विभाग में सक्षम अधिकारी थे, पूरा केंद्रीय जल आयोग था, उन महान पर्यावरण विदों एवं विद्वान इंजीनियरों की संगत में मुझे इस योजना को बहुत तेजी से आगे बढ़ाने का मौका मिलाl भारत माता का एक नाम ‘शस्य श्यामला’ भी हैl

परियोजना पर अमल के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिए थे निर्देश, बनाई थी कमेटी 

फरवरी 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए कि वह इस परियोजना पर समयबद्ध तरीके से अमल करे। जिससे इसकी लागत और न बढ़े। कोर्ट ने योजना पर अमल के लिए एक उच्च स्तरीय समिति भी बनाई। फरवरी 2012 में आए फैसले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस.एच. कपाड़िया और स्वतंत्र कुमार की, सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने कहा कि यह कार्यक्रम ‘राष्ट्रहित में है.’ उन्होंने नदियों को जोडऩे के लिए एक विशेष कमेटी बनाने का भी आदेश दिया था। इसके बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने 23 सितंबर 2014 को जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्रालय के तहत एक विशेष समिति का गठन किया था। अप्रैल 2015 में एक स्वतंत्र कार्यबल भी गठित किया गया। आपको बता दे कि सरकार में आने के पहले ही नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2014 में बिहार में आयोजित एक चुनावी रैली के बाद ट्वीट कर कहा था कि ‘नदियों को जोड़ने का अटलजी का सपना ही हमारा भी सपना है। हमारे मेहनती किसानों को यह ताकत दे सकता है’।

 बजट 2022-23 में केन बेतवा प्रोजेक्ट के लिए 1400 करोड़ रुपए का हुआ आवंटन

परियोजना के तहत केंद्र की मोदी सरकार द्वारा  1 फरवरी को आम बजट 2022-23 को  केन बेतवा प्रोजेक्ट के लिए 1400 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।  बता दे कि मार्च 2021 में  विश्व जल दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने करार पत्र पर हस्ताक्षर कर परियोजना को औपचारिक स्वीकृति दी थी । इस समझौते से उत्तर प्रदेश में बुन्देलखण्ड के बांदा, झांसी, महोबा, ललितपुर एवं हमीरपुर जिलों में कुल 2.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध एवं सुदृढ़ होगी, साथ ही उत्तर प्रदेश के झांसी, महोबा, ललितपुर एवं हमीरपुर में पेयजल के लिए 21 लाख की आबादी को 67 मिलियन क्यूबिक मीटर जल उपलब्ध कराया जा सकेगा। परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के पन्ना जनपद में केन नदी पर दौधन बांध बनाया जाएगा, जिससे 221 किलोमीटर लम्बी लिंक चैनल निकाली जाएगी, जो कि झांसी के निकट बरुआ में बेतवा नदी को जल उपलब्ध कराएगी।

सचिन गंगराड़े 

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