Wednesday, September 28, 2022
Homeताजा ख़बरेंMP News: रेवड़ी ऐसे बंटेगी तो बाँध तो फूटेंगे ही; नर्मदा घाटी...

MP News: रेवड़ी ऐसे बंटेगी तो बाँध तो फूटेंगे ही; नर्मदा घाटी प्राधिकरण में नियमों की ताक पर नियुक्ति

धार जिले के कारम डैम के साथ 305 करोड़ रूपये बह गए। बह गई किसानों की मेहनत की फसल, पशु और अब सिंचाई के साधन भी। कारम डैम निर्माण में उच्चस्तर पर भ्रष्टाचार हुआ या नहीं इसके लिए जांच कमेटी बना दी गयी है, आशा है सच्चाई बाहर आ जायेगी। लेकिन, जो खेल जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में चल रहा है, उससे और भी बाँध फूटेंगे, बहेंगे इतना तो तय है।

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और जल संसाधन विभाग के अति.मुख्य सचिव ने सब जानते हुए भी एक जूनियर अधिकारी को सदस्य अभियांत्रिकीय और उसी अधिकारी को सदस्य वित्त का प्रभार भी दे दिया । अधीक्षण यंत्री स्तर के अधिकारी पीके शर्मा को दोनों महत्वपूर्ण दायित्व का प्रभार देने के लिए सभी नैसर्गिक नियमों को ताक पर रखा गया। मूलतः जलसंसाधन विभाग के पीके शर्मा को पहले एनवीडीए में प्रतिनियुक्ति दी गयी। फिर विभागीय वरीयता को दरकिनार करते हुए, सदस्य अभियांत्रिकीय बनाया गया। इनकी नियुक्ति के लिए पहले कार्मिक में संविदा नियुक्ति की गयी, और संविदा कार्मिक अधिकारी से पीके शर्मा की नियुक्ति आदेश निकलवाया गया। आम तौर पर ऐसे दायित्व देने के लिए उच्च स्तर पर अनुशंसा की दरकार होती है, लेकिन विभागीय मुखिया ने समस्त शक्तियां खुद में समाहित करते हुए अधीक्षण यंत्री स्तर के अधिकारी को इतने महत्वपूर्ण पद पर बैठा दिया। हाल ही में इन्हीं पीके शर्मा को सदस्य वित्त का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया है।

50 हजार करोड़ से अधिक के काम पाइपलाइन पर

आगामी दिनों में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से लगभग 50 हजार करोड़ के आसपास के बांध, नहर निर्माण की निविदा जारी हो रहे हैं। जाहिर है दोनों अति महत्वपूर्ण विभागों का कार्य देख रहे पीके शर्मा की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होगी। वह भी जब उन्हें नियमों को दरकिनार करते हुए जिंम्मेदारी दी गयी है तो किसी समूह और व्यक्ति विशेष को उपकृत करने का ही उपक्रम करेंगे। ऐसे में सब कुछ पारदर्शी और नियमानुसार ही होगा , कह पाना  मुश्किल है। अनुभव और वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए विभागीय प्रमुख ने किसके इशारे पर एक ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति कराई वो भी दोनों महत्वपूर्ण प्रभार दिलाये ,ये जांच का विषय है। क्या इस नियुक्ति में मुख्यमंत्री को विश्वास में लिया गया? क्या नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के राज्यमंत्री से इस नियुक्ति की  सिफारिश ली गई??? क्यों वरिष्ठता के नियमों को दरकिनार किया गया?? एक् ही व्यक्ति को दो महत्वपूर्ण प्रभार क्यों दिया गया?? पीके शर्मा के सदस्य अभियांत्रिकीय का आदेश शासन स्तर से जारी न करते हुए प्राधिकरण स्तर से क्यों जारी किया गया?? ये कुछ ऐसे ज्वलंत प्रश्न हैं जिनका उत्तर मिलते ही समझ आ जायेगा कि कारम बाँध क्यों टूटा। जाहिर है प्रदेश के खजाने में सेंध विभाग के ही शीर्ष अधिकारी ही लगा रहे हैं।

विशेष पड़ताल

सुनील दत्त तिवारी

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments